डायबिटीज के मरीजों के लिए खानपान का सही चुनाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। खासकर जब बात रोटी की आती है, तो अक्सर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। कुछ लोग गेहूं की रोटी खाने से मना करते हैं, तो कुछ बाजरा, ज्वार या रागी को बेहतर विकल्प बताते हैं। ऐसे में यह समझना आसान नहीं होता कि आखिर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने के लिए किस आटे की रोटी अधिक उपयुक्त हो सकती है।
हाल ही में एक स्वास्थ्य विषयक सामग्री तैयार करने वाले विशेषज्ञ ने अलग-अलग प्रकार की रोटियों का परीक्षण कर यह जानने की कोशिश की कि कौन-सी रोटी खाने के बाद रक्त शर्करा का स्तर सबसे कम बढ़ता है। इस परीक्षण के परिणामों ने कई लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी एक परीक्षण के आधार पर सभी लोगों के लिए एक जैसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हर व्यक्ति का शरीर, स्वास्थ्य स्थिति और भोजन पर प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
डायबिटीज में क्या रोटी खाना बंद कर देना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि डायबिटीज होने का मतलब यह नहीं है कि रोटी पूरी तरह छोड़ दी जाए। बल्कि जरूरी यह है कि रोटी किस आटे की बनी है, उसकी मात्रा कितनी है और उसे किन खाद्य पदार्थों के साथ खाया जा रहा है।
यदि भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, रेशेदार खाद्य पदार्थ और हरी सब्जियां शामिल हों, तो ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। इसलिए केवल रोटी को दोष देना उचित नहीं माना जाता।
अलग-अलग रोटियों का किया गया परीक्षण
पोषण प्रशिक्षक और व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्रशिक्षक प्राणव मोहन ने अपने सामाजिक माध्यम मंच प्राणिफाई पर एक परीक्षण के परिणाम साझा किए। इस परीक्षण में सात अलग-अलग प्रकार के आटे से बनी रोटियों के बाद रक्त शर्करा में होने वाले बदलाव को लगातार ग्लूकोज मापने वाले उपकरण की मदद से दर्ज किया गया।
इस परीक्षण में गेहूं, रागी, बाजरा, ज्वार, मक्का और काले चने के आटे समेत कई प्रकार की रोटियों को शामिल किया गया। उद्देश्य यह समझना था कि किस प्रकार की रोटी खाने के बाद रक्त शर्करा में सबसे कम वृद्धि होती है।
परीक्षण में काले चने के आटे की रोटी रही आगे
साझा किए गए परिणामों के अनुसार, गेहूं की रोटी खाने के बाद ग्लूकोज स्तर में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं काले चने के आटे से बनी रोटी खाने के बाद रक्त शर्करा में वृद्धि सबसे कम देखी गई।
परीक्षण में बताया गया कि गेहूं की रोटी के बाद ग्लूकोज में लगभग 79 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज हुई और स्तर 170 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंचा। दूसरी ओर, काले चने के आटे की रोटी के बाद यह बढ़ोतरी लगभग 35 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रही और ग्लूकोज स्तर 99 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक पहुंचा।
इसी आधार पर परीक्षण में शामिल अन्य विकल्पों की तुलना में काले चने के आटे की रोटी को बेहतर परिणाम देने वाला विकल्प बताया गया।
आखिर काले चने का आटा क्यों माना जाता है बेहतर?
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, काला चना प्रोटीन और रेशेदार तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। रेशेदार भोजन पाचन की गति को धीमा करने में मदद कर सकता है, जिससे भोजन के बाद रक्त शर्करा का स्तर तेजी से बढ़ने की संभावना कम हो सकती है।
इसके अलावा, प्रोटीन से भरपूर भोजन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में भी मदद कर सकता है। हालांकि किसी भी खाद्य पदार्थ का प्रभाव व्यक्ति की उम्र, शारीरिक गतिविधि, दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
क्या गेहूं, रागी, बाजरा और ज्वार की रोटी नुकसानदायक हैं?
ऐसा बिल्कुल नहीं है। पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि गेहूं, बाजरा, रागी और ज्वार सभी अपने-अपने पोषक गुणों के कारण संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। इनमें रेशा, विटामिन और खनिज अलग-अलग मात्रा में पाए जाते हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि भोजन की कुल मात्रा, थाली का संतुलन और व्यक्ति की जीवनशैली भी ब्लड शुगर को प्रभावित करती है। इसलिए केवल किसी एक आटे को पूरी तरह अच्छा या बुरा कहना सही नहीं होगा।
यदि संभव हो, तो अलग-अलग प्रकार के अनाज का संतुलित उपयोग करना और भोजन में दाल, हरी सब्जियां, सलाद तथा प्रोटीन के अन्य स्रोत शामिल करना अधिक लाभदायक माना जाता है।
डायबिटीज के मरीज किन बातों का रखें ध्यान?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि डायबिटीज के मरीज केवल आटे के प्रकार पर ही ध्यान न दें, बल्कि भोजन के पूरे पैटर्न को संतुलित रखें। रोटी की मात्रा नियंत्रित रखें, भोजन के साथ पर्याप्त सब्जियां और प्रोटीन शामिल करें तथा नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
यदि किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज है, तो अपने चिकित्सक या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही भोजन में बदलाव करना बेहतर होता है। बिना विशेषज्ञ की सलाह के किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह अपनाना या छोड़ना उचित नहीं माना जाता।
निष्कर्ष
हालिया परीक्षण में काले चने के आटे की रोटी खाने के बाद रक्त शर्करा में सबसे कम वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह एक संभावित बेहतर विकल्प के रूप में सामने आई। हालांकि यह परिणाम एक सीमित परीक्षण पर आधारित है और इसे सभी लोगों पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए केवल रोटी का प्रकार ही नहीं, बल्कि संपूर्ण आहार, भोजन की मात्रा, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि आप अपने आहार में बदलाव करना चाहते हैं, तो पहले किसी योग्य चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।

